सुप्रीम कोर्ट : प्रेस व अभिव्यक्ति की लक्ष्मण रेखा तय, …पत्रकार को जेल जाना होगा

0
165

चीफ जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने मामले की सुनवाई की। वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को पड़ा भारी।  

Report4india bureau/ New Delhi.

कथित तौर पर वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को भारी पड़ गया। बचाव के सारे तंत्र फेल हो गये और उन्हें एक माह की जेल की सजा भुगतनी होगी। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय खंडपीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को उदारतापूर्वक दी गई सजा माना और आरोपी के वकील से कहा कि उन्हें जेल जाने दीजिए।

सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को कन्नड़ भाषा के एक साप्ताहिक अखबार के संपादक डीएस विश्वनाथ शेट्टी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा को लेकर शंडपीठ बनाई थी। इस खंडपीठ ने शेट्टी को किसी भी प्रकार से राहत देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, एक महीने की जेल एक उदार सजा है। कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शेट्टी द्वारा दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया। शेट्टी ‘तुंगा वर्थे’ कन्नड़ साप्ताहिक अखबार  के मालिक, प्रकाशक व संपादक हैं और 2008 में वकील टीएन रत्नराज के खिलाफ लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की थी, वकील के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।

इससे पहले, हाईकोर्ट ने शेट्टी की सजा को एक वर्ष से घटाकर एक महीना कर दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, ‘आपने किसी को ‘तीसरे दर्जे का वकील’ कहा। आप ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेंगे और दावा करेंगे कि पत्रकार हैं। यह ‘पीत पत्रकारिता’ है। यह उदारता है कि केवल एक महीने की कैद दी गई है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को प्रेस की स्वतंत्रता और जानने के अधिकार का उल्लंघन का दावा किया था, जिसे संविधान के अनुच्छेद-19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आंतरिक हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here