योगी आदित्यनाथ सख्त, भ्रष्टाचारी कितना भी बड़ा, …बख्शे नहींं जाएंगे 

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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ प्रेस को संबोधित करते हुए (फाइल)।

उत्तर प्रदेश में कई विभागों में ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार को लेकर कई अधिकारियों पर गाज, कई निलंबित

report4india/Lucknow-New Delhi.

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के शासन का एक ही आधार है, न तो भ्रष्टाचार बर्दाश्त करेंगे और न ही कानून-व्यवस्था से खिलवाड़। प्रदेश में तुष्टिकरण किसी का नहीं, विकास और सुशासन सबके लिए। योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में दूसरे कार्यकाल में कुछ विभागों में ट्रांसफर-पोस्टिंग में पहले से तय नियमों की अवहेलना किये जाने पर मुख्यमंत्री ने बड़ी कार्रवाई की है। लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय के बड़े अधिकारियों सहित मंत्रियों के ओएसडी पर भी गाज गिरी है। मामले में पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) को हटाकर उन्हें वापस दिल्ली भेज दिया गया है। साथ ही, उनपर अनियमितता और भ्रष्टाचार संबंधी गड़बड़ियों को लेकर जांच की भी सिफारिश की गई है। इन कार्रवाइयों को लेकर जितिन प्रसाद के नाराजगी की भी खबर आयी। हालांकि, जितिन प्रसाद ने  कहा कि भ्रष्टाचार और अनियमितताएं यदि कहीं हुआ है तो उसकी जांच व उसपर कार्रवाई जरूरी है। इस मामले में वे सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ हैं।

हालांकि, नाराज होने और अमित शाह से मिलने की खबर पर उन्होंने कहा, नाराजगी का प्रश्न ही नहीं है। वे अपने बड़े नेताओं से मिलते रहते हैं, फिलहाल किसी से मिलने की खबर गलत है।

उधर, उप्र सरकार में राज्मंत्री दिनेश खटिक ने गृहमंत्री अमित शाह को अपना इस्तीफा सौंपा है। इस्तीफा लेटर सामने आने के बाद बवाल मच गया है। अपने पत्र में उन्होंने दलित होने के नाते अधिकारियों पर उपनी उपेक्षा और विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। हालांकि, दिनेश खटिक ने इस बारे में मीडिया से पूरी तरह से किनारा कर लिया। इस संबंध में कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। मसलन, मंत्री दिनेश खटिक को किसी भी प्रकार की समस्या है तो उन्हें सीएम योगी से बात करनी चाहिए थी। यदि उन्हें इस्तीफा ही देना था तो वे सीएम को या फिर राज्यपाल को देते। परंतु, उन्होंने अपनी परेशानी व इस्तीफे की चिट्ठी गृहमंत्री अमित शाह को लिखी है।