…आखिर प्राणों से प्यारा सहारा एम्बी वैली की नीलामी के आदेश

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय को व्यक्तिगत रूप से 28 अप्रैल को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश देते हुए सहारा की सबसे प्रिय एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश दे दिया। शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को सहारा को झटका देते हुए लोनावाला में सहारा की एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश जारी कर दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने इस संपत्ति की बेचने के लिये बंबई हाई कोर्ट के एक अधिकारी को परिसमापक भी नियुक्त किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च को सहारा समूह को आगाह किया था कि यदि उसने वायदे के मुताबिक 17 अप्रैल तक 5,092.6 करोड़ रुपए जमा नहीं कराए, तो उसकी पुणे में अंबे वैली की 39,000 करोड़ रुपए मूल्‍य की प्रमुख संपत्ति की नीलामी की जाएगी। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने न्यूयार्क के प्लाजा होटल में सहारा की हिस्सेदारी 55 करोड़ डॉलर में लेने की इच्छा जताने वाली अंतरराष्ट्रीय रीयल एस्टेट कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अपनी सही मंशा को दिखाने के लिए शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के बजाय सेबी-सहारा रिफंड खाते में 750 करोड़ रुपए जमा कराए। न्यायालय की इस पीठ में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एके सीकरी भी शामिल थे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि वायदे के मताबिक तय समय सीमा में यह पैसा जमा नहीं कराया गया, तो हम सहारा की एम्बी वैली परियोजना की नीलामी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले धन की वसूली के लिए सहारा समूह की इस प्रमुख संपत्ति की कुर्की का आदेश दिया था।
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही सहारा समूह से दो सप्ताह में उन संपत्तियों की सूची देने को कहा है जिन पर किसी तरह की देनदारी नहीं है और जिन्हें सार्वजनिक नीलामी के लिए रखा जा सकता है तकि निवेशकों को लौटाए जाने वाले मूल धन के शेष 14,000 करोड़ रुपए की राशि जुटाई जा सके। निवेशकों से जुटाई गई मूल राशि 24,000 करोड़ रुपए है जिसे लौटाया जाना है। यह पैसा सेबी-सहारा खाते में जमा कराया जाना है। न्यायालय ने पिछले साल 28 नवंबर को सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को जेल से बाहर रहने के लिए 6 फरवरी तक सेबी-सहारा रिफंड खाते में 600 करोड़ रुपए जमा कराने को कहा था। न्यायालय ने चेतावनी दी थी कि यदि वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा।

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