हमारा धर्म व प्रवृति प्रकृति की ही साधना : जीएल शर्मा

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मूलत: हिन्दू धर्म प्रकृति की ही पूजा है। हर स्तर पर और हर मौके पर हम प्रकृति प्रदत वस्तुओं को पूजते हैं, उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं। इसीलिए, हमारा मन-स्वभाव संतोषी होता है।

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रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

गुरुग्राम। हरियाणा डेयरी प्रसंघ के चेयरमैन और वरिष्ठ बीजेपी नेता जीएल शर्मा ने कहा, हम ऐसे देश में रहते हैं, जहां प्रकृति हमारा धर्म भी है और प्रवृति भी। पशु-पक्षी, पेड़-पौधों, पृथ्वी, सूर्य-चंद्र हम सबकी पूजा करते रहे हैं और इसलिए हम शोषण व संग्रह की प्रवृत्ति से बचे रहे हैं। आज उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन कम हैं, यह जानते हुए उपभोग की सीमा को हम स्वयं तय करें। वे रविवार को सृष्टि फाउंडेशन द्वारा पर्यावरण पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। इस दौरान पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री, नेचर इंटरनेशनल के अध्यक्ष व उद्योगपति शरद गोयल भी मौजूद थे।

इस मौके पर जीएल शर्मा ने कहा कि मूलत: हिन्दू धर्म प्रकृति की ही पूजा है। हर स्तर पर और हर मौके पर हम प्रकृति प्रदत वस्तुओं को पूजते हैं, उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं। इसीलिए, हमारा मन-स्वभाव संतोषी होता है। परंतु, आज इस प्रवृति में कहीं न कहीं कमी दिखाई देती है। हमारा काम उस भाव को भरने का है।

उन्होंने कहा, हम तो कण-कण में देवता का दर्शन करते हैं। 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशय भी इसी समग्रता से है। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं का आह्वान किया कि, एक बार फिर हम अपनी प्राचीन धर्म-व्यवहार प्रवृति को व्यवहार में उतारें, जिससे कि प्रकृति की रक्षा हो सके।

इस दौरान संस्था के अध्यक्ष डॉ. वीके त्रिपाठी, महासचिव अवधेश कुमार, राजेश पटेल, आरती, मुकेश जांगड़ा, सत्येंद्र सिंह, विजय वर्मा, शरद महेश्वरी, विश्वरंजन, सीमा शर्मा, ऋषि महेश्वरी, ऋतु, राधा रानी सोलंकी, डॉ. शिवानी शोलापुरी, निधि, रेणु गोयल, अनिल कुमार, अमित कुमार, डॉ. पीके चौधरी, डॉ. प्रिया भारती, डॉ. अनुपम चौधरी, विपिन जायसवाल, पं. सिद्धनाथ मिश्रा, सोनिया रावत, रघुवीर सिंह, महेश वशिष्ठ आदि उपस्थित थे।

 

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