कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ मामला लटकाया : राम मंदिर समर्थक

0
113
ayodhya-sriramjambhoomi

राम मंदिर पक्षकार ने श्री-श्री रविशंकर के नाम पर आपत्ति। अयोध्या के संत मामले में मध्यस्थ की भूमिका के लिए काबिल    

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर हिन्दू पक्षकारों व संत समाज ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा, निर्णय देने के मौके पर मद्यस्थता की बात केवल मामले को लटकाने का सुप्रीम कोर्ट का एक और प्रयास है। कुछ ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव तक मामला लटकाने के लिए मध्यस्थता का विकल्प चुना है।

रिपोर्ट4इंडिया से बातचीत में अध्योध्या के संतों-साधुओं सहित हिन्दू पक्षकारों ने भी इस मध्यस्थता पैनल पर आपत्ति जताई है। साथ ही, पूरी संभावना व्यक्त की कि यह मात्र मामले को लटकाने का एक उपक्रम है।

उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट को जब यही करना था तो पूर्व मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने मध्यस्थता की बात कही थी, उसी को आगे बढ़ाना चाहिए था। लेकिन चीफ जस्टिस गोगोई ने पहले दो माह मामले को टाल दिया। उसके बाद पहले के गठित पीठ बदल दिया। उसके बाद भी, दो बार पीठ का गठन किया। इस प्रक्रिया में पांच माह का समय बर्बाद किया गया। ऐसा लगता है कि कोर्ट का पूरा प्रयास इस मामले को लोकसभा चुनाव के बाद तक टालना था और कोर्ट ने वैसा ही काम किया।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या रामजन्मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए रिटार्यड जस्टिस कलीफुल्ला के चेयरपर्सन के पैनल का गठन किया है। उसमें वकील श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री-श्री रविशंकर शामिल हैं। कमेटी आठ सप्ताह में अपना रिपोर्ट देगी।

निर्मोही अखाड़ा के महंत सीताराम दास ने कहा, श्री-श्री रविशंकर पहले जिस प्रकार से मध्यस्थता कर रहे थे वह सवालों के घेरे में रहा। कुल मिलाकर मामले को एक बार फिर से लटकाने का काम किया गया है। उन्होंने कहा, रविशंकर इस मामले में मध्यस्थता करने वाले होते कौन हैं? अयोध्या के संतों ने कहा कि समझौता पक्षकारों को करना है, लेकिन इस पैनल में पक्षकार हैं ही नहीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here