बीच चुनाव कहां गायब हुई …’लड़की’

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चुनाव की घोषणा के बाद से ही उत्तर प्रदेश की राजनीति से प्रियंका वाड्रा और कांग्रेस सीरे से गायब है। राजनीतिक परिवेश में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रदेश में कांग्रेस की दूर्दशा का यह सबूत है। 

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

पिछले दो-ढाई साल से कांग्रेस महासचिव व कांग्रेस के तीन आलाकमान में शामिल सोनिया गांधी की पुत्री व राहुल गांधी की बड़ी बहन प्रियंका वाड्रा उत्तर प्रदेश में हर मामले पर सक्रियता दिखा रहीं थीं। यहां तक चुनाव की घोषणा से दो-तीन माह पहले से ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देने के साथ ही विधानसभा में चुनाव में 40 फीसद सीटों पर महिलाओं को टिकट देने के ऐलान किया था। अब जबकि, चुनाव आयोग द्वारा चुनाव घोषणा को करीब 10 दिन बीत चुके हैं और प्रियंका वाड्रा उत्तर प्रदेश में अचानक पूरे चुनावी माहौल से गायब दिख रहीं हैं। कोई हलचल, कोई सुगबुगाहट, कोई संकेत, कोई मोर्चेा, कोई रणनीति नहीं दिख रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खासकर प्रियंका वाड्रा के अचानक सन्नाटा से राजनीतिक हलकों में सुगबुगाहट है कि आखिरकार काांग्रेस की रणनीति क्या है?

जहां अन्याय दूसरी सियासी पार्टिया रोजाना अपने गठबंधन, अपने वादे व योजनाओं को लेकर सामने हैं। व्यवहारिक तौर पर रैलियों पर रोक के चलते सियासी पार्टियों ने रोजाना प्रेस कांफ्रेंस कर टीवी व सोशल मीडिया पर आकर अपने को जनता के सामने प्रस्तुत कर रहीं हैं। परंतु, कांग्रेस ऐसा कुछ नहीं कर रही है। कांग्रेस अपने दल में ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ पोस्टर गर्ल प्रियंका मौर्या द्वारा खुद टिकट काटे जाने को लेकर लगाए जा रहे सार्वजनिक आरोपों पर भी चुप है।

चुनाव की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों ने पहले व दूसरे दौर के चुनाव के उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं परंतु, कांग्रेस इस मुद्दे पर भी सन्नाटे में है। प्रियंका वाड्रा के आधिकारिक ऐलान के बाद कि उत्तर प्रदेश की 403 सीटों की 40 फीसद उम्मीदवार महिलाएं होंगी। इसका मतलब है कांग्रेस की तरफ से 160 सीटों पर महिलाएं चुनाव में होंगी। अब 160 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को लेकर भी कांग्रेस में अबतक कोई चर्चा नहीं है। इतनी संख्या में अचानक कांग्रेस जिताऊ महिलाओं का इंतजाम कहां से कर पायेगी। दूसरी तरह पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं के बीच भी उहापोह की स्थिति है।

उधर, राहुल गांधी की विदेश यात्रा खत्म नहीं हो रही है और पांच राज्यों में चुनाव की बिगुल बज चुकी है, सारे चुनावी योद्धा मैदान में हैं। सियासी दांव-पेंच आजमाये जा रहे हैं परंतु कांग्रेस सीरे से गायब है।

जा कांग्रेस उप्र में पिछले दो-ढाई साल से सक्रियता दिखा रही थी वह चुनाव घोषाणा के बाद अचानक गायब हो गई है। इसको लेकर जहां सियासी हलकों में चर्चा है वहीं, आम कांग्रेसी भी परेशान हैं। क्या यह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल जैसी कोई रणनीति है या फिर उप्र के वर्तमान राजनीतिक स्थिति से पलायन है। हिन्दू व हिन्दुत्व को मुद्दा बनाने वाले सलमान खुर्शीद कहां है? जब सबकुछ के बाद भी मुसलमान कांग्रेस को एक ढेले की तरह भी नहीं समझ रहा तो फिर किस हैसियत से राहुल गांधी कांग्रेस को मुसलिमों की पार्टी बताते हैं। हिन्दू धर्म पर सवाल उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की बोटी-बोटी काटने का बयान देने वाले इमरान मसूद को सिर बिठाने वाले राहुल-प्रियंका को मसूद ने खूद ही झटका दे दिया। दरअसल, कांग्रेस के नेता राजनीतिक तौर पर अंधे कुएं में कूदकर आत्महत्या कर रही है।