निर्दलीयों को ‘सुरक्षित घेरे’ में लेने की कवायद

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मतगणना से पहले बुधवार रात ही कई संभावित जीत वाले निर्दलीय उम्मीदवारों के घरों पर सुरक्षा बढ़ाकर बीजेपी सरकार ने उन्हें अपने पाले में लाने की पहल शुरू कर दी थी।   

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

गुरुग्राम। हरियाणा में बहुमत का आंकड़ा पार न होते देख राज्य में सत्ताधारी बीजेपी ने बढ़त बनाने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने घेरे में लेने की कवायद तेज कर दी है। हालांकि,  मतगणना से एक दिन पहले बुधवार रात से ही कई निर्दलीय उम्मीदवारों जो संभावित जीत की रेस में आगे थे, उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। माना जा रहा है कि यह कवायद उन्हें अपने पाले में लाने कि लए है।

इससे पहले बीजेपी ने 23 अक्टूबर की रात को ही जीतने वाले संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने घेरे में लाने का काम शुरू कर दिया था। बादशाहपुर और पटौदी के निर्सेदलीय उम्मीदवारों के घर पर सुरक्षा के नाम पर घेरेबंदी की गई और उनके दफ्तर-घरों पर सुरक्षा व्य्वस्था बढ़ा दी गई। हालांकि, चुनाव के संभावित परिणामों को राजनीति में पहले समझने और अपने पाले में अमल करने की पहल सत्ताधारी पार्टी हमेशा से करती रही है।

2009 में गुरुग्राम में जब निर्दलीय उम्मीदवार सुखबीर कटारिया जीत रहे थे तो वे अचानक पत्रकारों के बीच से ही गायब हो गए और बाद में पता चला कि उन्हें तत्कालीन सीएम हुड्डा ने दिल्ली के लिए उठा लिया था। उसके बाद कटारिया हुड्डा सरकार में शामिल हुए, मंत्री बने और वे हुड्डा के विश्वसनीय बनकर रहे और हुड्डा ने 2019 में उन्हें गुरुग्राम विस से कांग्रेस का टिकट दिया।

बादशाहपुर विस सीट के निर्दलीय उम्मीदवार राकेश दौलताबाद बीजेपी से काफी बढ़त बढ़ा चुके हैं और पोल वोटिंग के मुताबिक उन्हें अब हराना संभव नहीं है। फिलहाल वे बीजेपी के मनीष यादव से करीब 12 हजार वोटों से आगे हैं।

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