‘धर्म के नाम पर देश का बंटवारा व हिंसा से भारत की बदनामी’

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दरअसल, देश में आज भी मुसलिमों के नेता उसी बंटवारे की ओर अपनी राजनीति को धार देते हैं जिससे देश बंटा। उनके लिए यह एक बड़ा मौका है कि उन्हें मुसलमानों के नाम पर एक अलग देश भी मिला और भारत में धर्म के नाम पर वोट की राजनीति के चलाने से फिर वे उस स्थिति में पहुंच जाएं जहां से वे एक और बंटवारा कर सकें। ओवैसी जैसे नेता दरअसल, मुसलमानों को एकजुट करने के लिए आरएसएस और बीजेपी को टारगेट करते हैं ताकि हिन्दुओं को एकजुट होने से रोका जा सके, बीजेपी की सरकार बनने से रोका जा सके।

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। देश में आतंकवादी अफजल गुरु को समर्थन, धर्म के नाम पर मुसलमानों को एपने पक्ष में गोलबंद करने की हर एक राजनीति को सार्वजनिक अलम में लाने का काम करने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर हमला बोला है। दरअसल, उन्हें की प्रचीन हिन्दू संस्कृति व सभ्यता से भारी विरोध है। हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने मॉब लिंचिंग पर दिए मोहन भागवत के बयान पर कहा कि जिस विचारधारा ने महात्मा गांधी और तबरेज की हत्या की, उससे ज्यादा भारत की बदनामी नहीं हो सकती।

ओवैसी ने कहा, मोहन भागवत लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने की बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि वो ये कह रहे हैं कि इसे लिंचिंग न कहा जाए। जबकि दशहरा के मौके पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हिंसा भारती की संस्कृति नहीं है। इसे रोकने के लिए कड़ा कानून बने। कुल लोग इसकी आड़ में भ्रम फैलाते हैं। मॉब लिंचिंग पश्चिमी तरीका है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। औवैसी हमेशा मोहन संघ व  भागवत पर हमला करते हैं। दरअसल, वे इसी बहाने देश के हिन्दू चरित्र-व्यवहार पर हमला कर अपने पक्ष में मुसलमानों को गोलबंद करते हैं।

औवैसी उसी हैदराबाद के निज़ाम के वंशज़ है जिन्होंने में भारत में विलय का विरोध किया था और जिसके राज्य की 80 फीसद प्रजा हिन्दू थी और उसके शोषण का भारी शिकार थी। भारत का विरोध ओवैसी के नस-नस में है इसीलिए अफनी पार्टी का नाम में ‘मुस्लिमीन’ जोड़ा है।

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