झारखंड बन रहा कन्हैया कुमार का नया ‘ठिकाना’

0
284
क्नहैया कुमार (डिजाइन फाइल फोटो)।

“झारखंड सरकार में हिस्सेदार कांग्रेस और राजद का कन्हैया कुमार से गहरा संबंध। जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी के बाद समर्थन में कन्हैया कुमार के सपोर्ट में उनके साथ राहुल गांधी बैठे थे। वैचारिक राजनीति के परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस और वामपंथियों का ‘चोली-दामन’ का साथ है। इसीलिए कांग्रेस सरकार ने जवाहर लाल नेहरू विवि बनाकर तोहफा के रूप में वामपंथी विचारक गिरोहबाजों को सौंप दिया था।”

Manoj Kumar Tiwary/ Report4India/New Delhi.

जेएनयू में कन्हैया कुमार सहित 10 आरोपियों के देशद्रोही नारा लागने के आरोप में 14 जनवरी 2019 से दायर चार्जशीट को रोके रखने के बाद आखिरकार दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने मंजूरी दे दी है। आरोप पत्र की मंजूरी के बाद इसपर सियासत भी तेज हो गई है। झारखंड में हुए विस चुनाव में  बीजेपी सरकार की हार के बाद कांग्रेस-राजद की संयुक्त हेमंत सोरेन सरकार के दौर में राज्य को अपना नया ठिकाना बनाने में लगा वामपंथी कन्हैया कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।

झारखंड अत्यंत समृद्धि व संवेदनशील राज्य है। यह जहां कई तरफ से पश्चिम बंगाल से जुड़ा है वहीं नक्सल प्रभावित देश के राज्यों में यह अव्वल है। आदिवासी व जंगल से जुड़े एक बड़ी जनसंख्या वाले इस राज्य में राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव को लेकर लंबे समय से संघर्षरत रहा है। बड़ी संख्या में यहां के आदिवासियों का धर्म परिवर्तन लंबे समय से होता रहा है। अलग राज्य बनने के बाद से ही झारखंड राजनीति के प्रयोगशाला की कसौटी पर कसता रहा है। ऐसे में सरकार परिवर्तन के बाद से ही कन्हैया कुमार की झारखंड में गतिविधियां बढ़ गई है। वे लगातार झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भी कन्हैया कुमार की सक्रियता को समझा जा सकता है। हालांकि, माना जा रहा है कि जेएनयू आधारित ‘शहरी नक्सल’ की रूपरेखा और नीति भी इसके पीछे एक कारण है।

वैसे भी, वामपंथियों के गढ़ में कन्हैया कुमार जिस प्रकार गिरिराज सिंह ने चारो खाने चित्त कर दिया, उनके लिए बेगुसराय में कुछ भी नहीं बचा है। कन्हैया कुमार के समर्थन में सीताराम येचुरी, जावेद अख्तर, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर, शबाना आजमी जैसे दिग्गजों के प्रचार के बावजूद गिरिराज सिंह ने 4 लाख 22 हजार 274 मतों के हिमालय अंतरमत से मात देकर 57 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किया। हार के बाद से ही कन्हैया बेगुसराय से बाहर हैं।

अपने उपर देशद्रोह केस के आरोप पत्र पर अनुमति दिए जाने के बाद कन्हैया कुमार ने रांची में ही ट्वीट कर कहा है कि ‘‘राजद्रोह के मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत में चलाई जाए ताकि यह प्रकरण समाप्त हो सके।

इसी मामले में आरोपी उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने भी संयुक्त बयान ट्वीट किया है जिसमें कहा है कि ‘दिल्ली सरकार के हमारे खिलाफ राजद्रोह के मामले में अनुमति देने की खबर हमें बिल्कुल परेशान नहीं करती। हमें अपनी बेगुनाही का पूरा भरोसा है, न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।’

ये वहीं उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य, कन्हैया कुमार हैं जो आतंकी अफज़ल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी दिए जाने को ज्यूडिशियल कीलिंग करार दे रहे थे और जब खुद पर आरोप है तो कोर्ट में विश्वास प्रकट कर रहे हैं। जेएनयू के त्तकालीन छात्रसंघ के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में आतंकी अफज़ल के समर्थन में कार्यक्रम किया गया जिसमें सभी शामिल होकर भोरत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह और आजादी के नारे लगाए गए। इन नारों में सबकी सहभागिता रही लेकिन जब मामला आगे बढ़ा तो ये सभी इसे झुठलाने का प्रयास करने लगे हैं। ये सभी यह कह रहे हैं नारे लगाने वाले दूसरे थे, वे जिम्मेदार हैं। यानी कार्यक्रम के आयोजन करने वाले नहीं, नारे लगाने वाले जिम्मेदार हैं।

मामले की तीन साल तक चली जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने 1200 पन्नों में दाखिल अपनी चार्जशीट में कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान के साथ ही सात कश्मीरी छात्रों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दायर किया था। परंतु, करीब एक साल एक माह तक दिल्ली की केजरीवाल सरकार केस चलाने की जरूरी संवैधानिक अनुमति देने से बचती रही।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here