उल्टी न पड़ जाए ‘ध्रुवीकरण’ की यह खतरनाक कोशिश

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बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाकर 2019 गंवाने वाली कांग्रेस का अब ‘तालिबान’ के मद्देनजर बीजेपी पर हमला कहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भारी न पड़ जाय।   

डॉ. मनोज कुमार तिवारी@ drmanojtiwari24@gmail.com

रिपोर्ट4इंडिया/ नई दिल्ली।

अगले साल 2022 के प्रथम तिमाही में उप्र में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को चुनौती देने में प्रदेश के राजनीतिक दल स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस गांधी परिवार (प्रियंका गांधी) की बची-खुची इज्जत बचाने को तमाम विपक्षी दलों के साथ बैठक करने को मजबूर है। इसी बीच उप्र में सपा के सांसद फीकुर्रहमान बर्क और उनके बेटे सहित मुन्नवर राणा, असदुद्दीन ओवैसी आदि ने जिस तरह से तालिबान का समर्थन किया है, उससे साफ है कि उप्र चुनाव में मजहबी कट्टरवाद को फैलाकर वे मुसलिम धर्म विशेष के लोगों का वोट अपने पक्ष में एकजुट करना चाहते हैं। हालांकि, उपरोक्त सभी के इस तरह के बयान उनकी राजनीति का ही हिस्सा रहा है, इसलिए उनसे अपेक्षा भी यही है।

परंतु, कांग्रेस नेता और प्रियंका वाड्रा गांधी के राजनीतिक सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णन ने सीधे तौर पर तालिबान को 2022 के उप्र विधानसभा चुनाव में घसीटा है वह न केवल स्वयं को डूबाने वाला बल्कि, उप्र में कांग्रेस के पल्ले पड़ने वाली ‘जूठन’ को भी थाली से गिराने जैसा है। आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा, 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का मुद्दा भुनाया था, वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वह तालिबान का मुद्दा भुनाएगी। बीजेपी ने प्रमोद कृष्णन के इस बयान को सीधे तौर पर लपक लिया।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक न्यूज़ चैनल पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, प्रमोद कृष्णन का बयान साफतौर पर कांग्रेस का वहीं पुराना ‘तुष्टीकरण’ तराना है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि क्या कांग्रेस यह कहना चाहती है कि अफगानिस्तान में जो चल रहा है, वह बीजेपी के चलते है? बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल भी तो कांग्रेस ने ही उठाया था। क्या चुनाव में कांग्रेस मुसलमानों को डराकर वोट पाना चाहती है? बीजेपी कभी भी इस तरह की बयानबाजी नहीं करती। हमारा संकल्प ही ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। कांग्रेस हमेशा ‘कट्टरवादी ताकतों’ के बल पर राजनीतिक हैसियत प्राप्त करने की कोशिश करती है और इसीलिए वह मुंह के बल गिरती जा रही है।

उधर, तालिबान पर बयान देने वाले सपा नेता पर भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने हमला बोला और कहा कि समाजवादी सांसद का तालिबान समर्थन स्पष्ट कर देता है कि समाजवादी पार्टी व उनको सांसद बनाने वालों की मानसिकता क्या है। जिनके जेहन में ही जेहाद है ऐसे सभी लोग न सिर्फ मानवता के दुश्मन हैं बल्कि देश के भी दुश्मन हैं। सपा का तालिबान समर्थन का लक्ष्य एक विशेष तबके का वोट पाना है।