‘बुल और बुलडोजर’ की ताकत

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“चुनाव में खुले में घूमने वाले पशुओं खासकर साढ़ों को लेकर जहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव में एक मुद्दा बनाया वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बुलडोजर पूरे चुनाव में जनता के बीच बुलंद आवाज में एक समेकित नारे के रूप में गूंजा”

डॉ. मनोज कुमार तिवारी@report4india.

37 साल बाद उत्तर प्रदेश ने अपना राजनीतिक इतिहास दोहराया है। करीब चार दशक के बाद कोई पार्टी उत्तर प्रदेश में बहुमत से सत्ता में दोबारा वापस लौटी है। साथ ही, स्वतंत्रता के बाद पहली बार सीटिंग सीएम उत्तर प्रदेश में दोबारा सीएम बनने जा रहे हैं। स्पष्ट तौर पर उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास पूरा पलट गया है। जो राज्य जाति-संप्रदाय, बाहुबली रूप में राजनीतिक तौर पर चुनाव के बाद सामने दिखाई देता था, वह आज विकास, गरीब कल्याणकारी योजनाएं, महिला सुरक्षा व बेहतर कानून व्यवस्था आदि के रूप में आकार लेता है। इस परिवर्तन को गीकृत कर उत्तर प्रदेश के लोगों ने एकबार फिर योगी आदित्यनाथ को सत्ता के केंद्र में स्थापित कर दिया है। यहां समझने वाली बात यह है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ सीएम के तौर पर जनता के सामने नहीं थे।

सीएम बनने के बाद योगी ने उत्तर प्रदेश सबसे पहले कानून का राज स्थापित करने का काम किया। महिलाओं को सरेआम छेड़ने वाले, चोरी-छिनौती करने वाले, रस्ते चलते व रात में गाय-भैंस खोल काट देने वालों पर कार्रवाई शुरू हुई। दो-टकिया गलियों-कस्बे के बदमाश जो पुलिसवालों को सपा से जुड़े लोगों को चढ़ावा चढ़ाकर बिना किसी डर के बदमाशी करते, उन्हें निपटाने का काम किया। सभी ने देखा कि कैसे खासकर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों पर कानून का डंडा चलने लगा। वे गले में तख्ती लटकाकर पुलिस के सामने सरेंडर करने लगे। इससे समाज में काननू का राज स्थापित करने में योगी सरकार को सफलता मिली। इसके बाद सरकार का डंडा भूमि व खनन माफिया पर चली। उन्हें जेल में डालकर उनकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया। जो जनता शहर-दर-शहर रस्ते  चलते बड़े-बड़े माफिया के बिल्डिंग देख डर के मारे नजरें नीचे कर लेती है आज बुलडोजर से उसे जमींदोज होते हुए देखते है।

पूरे चुनाव में ‘बाबा’ यानी सीएम योगी का बुलडोजर सरकार की ताकत का सिंबल बन गया। आम जनता की सुरक्षा का पर्याय हो गया। इस चुनाव में बुलडोजर सबसे बड़ा नारा बन गया। बुलडोजर यानी कानून की शक्ति के सिंबल के असर को कम करने को समाजवादी पार्टी ने ‘बुल’ यानी खुले साढ़ों का मुद्दा उठा दिया। बाबा के साढ़ खुले घूम रहे हैं, किसानों की फसल नष्ट कर रहे हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने साफतौर पर कहा, हम किसी भी हालत में साढ़ों-गायों व अन्य जानवरों को कटने नहीं देंगे। जनता ने भी इसका समर्थन किया और कहा कि ये पशु आकाश से नहीं उतरे हैं ये किसानों के ही पशु हैं और उन्हें भी रहने का हक है। हालांकि, योगीजी ने कहा कि चुनाव के बाद इस समस्या का समुचित हल निकाला जाएगा।

इस प्रकार, इस चुनाव में बुलडोजर के साथ ‘बुल’ यानी साढ़ (अवारा पशुओं) ने भी अपनी शक्ति लगा दी और नतीजतन नया इतिहास लिख दिया गया।