प्रद्युम्न हत्या : खट्टर सरकार की ‘फेस सेविंग’ को सीबीआई का भोंडा प्रयास!

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पुलिसिया आरोपी बस कंडक्टर अशोक की जमानत का विरोध सीबीआई यह जानते हुए भी विरोध कर रही थी कि उसके पास कोई सबूत नहीं है और उसने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया है। दरअसल, इस केस के दबने या ठंडा होने तक कंडक्टर को दबाव के तहत सीबीआई जेल में रखना चाहती थी ताकि फिलहाल हरियाणा सरकार किरकिरी से बच जाए। लेकिन कोर्ट की मुस्तैदी ने सीबीआई के इस मंसूबे को ध्वस्त कर दिया।       

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डॉ. मनोज कुमार तिवारी/गुरुग्राम

सीबीआई ने इस जघन्य हत्या मामले में स्कूल के ही छात्र को आरोपी बताकर गिरफ्तार करने के दौरान ही सीबीआई ने एक प्रकार से इसी मामले में गुरुग्राम पुलिस के आरोपी बस कंडक्टर अशोक को क्लीन चिट दे दी थी। उस दौरान, सीबीआई ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब में कहा था, अब तक कंडक्टर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। सीबीआई जांच के इस खुलासे और छात्र की गिरफ्तारी के बाद ही हरियाणा पुलिस की कलई खुल गई। सामने हरियाणा के डीजीपी आए और अपनी पुलिस की नाक बचाने लगे। वे ‘पुलिसिया’ कार्रवाई को सही बताने से भी नहीं चुके। यह जानते हुए भी कि, सीबीआई ने पुलिस जांच की धज्जियां उड़ाकर उसे तिनके की तरह बिखेर दी है।
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इस मामले में सीबीआई का यह खुलासा हरियाणा के बीजेपी व मनोहर लाल सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में हुई लापरवाहियों, प्रशासनिक विफलता और शासन-प्रशासन पर ढीली पकड़ की सबसे बड़ी घटनाओं हिसार के बरवाला सतलोक आश्रम कांड, जाट आंदोलन, राम रहीम पंचकूला हिंसा के तीन बड़े मामले के बाद साढ़े तीसरी बड़ी घटना गुरुग्राम रेयान स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या है। मामले में सीबीआई के नए खुलासे के बाद स्पष्ट हो गया कि मामले में पुलिस स्थानीय दबाव में काम कर रही थी। खट्टर सरकार के एक मंत्री का नाम इस मामले में आ रहा है। उस मंत्री ने न केवल सीबीआई जांच का विरोध किया बल्कि सीबीआई के खुलासे पर भी सवाल खड़ा कर दिया। यह मनोहर लाल सरकार की कलई खोलने के लिए काफी है। उधर, सीबीआई की जांच पुलिस के जांच के उलट होने के सवाल पर सीएम मनोहर लाल ने खुद पुलिस के पक्ष में खड़े हो गए। यानी, साफतौर पर एक सीएम खुद ही पूरे मामले की लीपापोती करने में लग गया। परिणाम यह हुआ कि सीबीआई ऐसा दिखावा करने लगी कि, उसने अभी मामले में पुलिस के आरोपी बस कंडक्टर को क्लीन चिट नहीं दी है। यह इशारा काफी है कि इस मामले में केंद्र की ओर से सीबीआई पर दबाव बनाया जाने लगा। इसी दबाव के फलस्वरूप कोर्ट में बिना किसी सबूत के सीबीआई बस कंडक्टर के जमानत का विरोध करने लगी। सीबीआई के इस रूख का जिला कोर्ट ने जबरदस्त फटकार लगाई। गुरुग्राम जिला कोर्ट ने सीबीआई के वकील को न केवल चेतावनी दी बल्कि उन्हें सावधान भी किया। कोर्ट में सबूत देने की जगह जमानत को टालने का प्रयास कर रही सीबीआई मुंह की खाई और कोर्ट ने बस कंडक्टर अशोक को जमानत दे दी।
मामले में सीबीआई का बदलता व्यवहार यह बताने के लिए काफी है कि नए खुलासे के बाद उसपर दबाव बनाया गया। इस दबाव पर सीबीआई फिलहाल किसी तरह से कंडक्टर की जमानत का विरोध करे और उसे इस ताजा हालात में जेल से निकलने का सरकार विरोधी अवसर न पैदा होने दे। सीबीआई इसी पर काम करने लगी। सीबीआई को यह पता है कि कंडक्टर का इस पूरे मामले में कोई रोल नहीं है लेकिन वह ताजा दबाव में खट्टर सरकार का ‘फेस सेविंग’ करने की कोशिश करने लगी। दरअसल, हरियाणा सरकार अपने ‘फेस सेविंग’ में यह चाहती थी कि मामला ठंडा पड़ जाए तो दो-तीन माह बाद कंडक्टर जेल से निकले। ताकि, पुलिस और मंत्री सहित हरियाणा सरकार पर उठ रहे सवाल और गुरुग्राम पुलिस जांच टीम पर कार्रवाई का दबाव कम हो जाए।
लेकिन, गुरुग्राम कोर्ट ने सीबीआई के इस चाल को कोट दिया। सीबीआई के सतही विरोध को खारिज करते हुए निचली अदालत ने हरियाणा पुलिस द्वारा जेल में बंद किए गए आरोपी कंडक्टर अशोक को जमानत दे दी। कोर्ट में जिस फॉरेंसिक रिपोर्ट की बात कहकर कंडक्टर अशोक के जमानत का विरोध कर रही थी, उसे खारिज़ कर दिया। दरअसल, उस फॉरेसिंक रिपोर्ट का कंडक्टर के मामले से कोई लेना-देना नहीं था। सीबीआई के वकील भी इस बात को जानते थे लेकिन कोर्ट में गैरजरूरी दलील पेश कर रहे थे। इस पर कोर्ट ने उन्हें रोका, कोर्ट में सीबीआई के व्यवहार की भर्त्सना की और चेतावनी दी। साफतौर पर, यहां सीबीआई ऊपर से पड़े दबाव के तहत  काम करने की कोशिश की।
अब, कंडक्टर को जमानत मिल जाने के बाद हरियाणा सरकार पर पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लेकिन, खट्टर सरकार तो जैसे लोकतांत्रिक नौतिक मूल्यों को भूल ही चुकी है। राज्य के लोगों को नहीं लगता कि, सरकार बिना भारी दबाव के या कोर्ट के डर के पुलिस और संबंधित मंत्री पर कार्रवाई करने को लेकर कोई नैतिक कदम उठा पाएगी?

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