मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका में प्रशांत भूषण!

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चंदा के रूप में एक करोड़ रुपए लेने के बाद भी केजरीवाल ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया तो ये ‘अफलातून’ कुछ नहीं कर सके। पर, मोदी सरकार के हर फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहे

सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना को सरकार ने छुट्टी पर भेजा तो फैसले के खिलाफ प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया 

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मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया। 

नई दिल्ली। वर्तमान में देश में अजीब प्रकार की नीति-राजनीति के साथ तथाकथित बौद्धिक गठजोड़ दिखाई देता है। ऐसे में कौन नेता है, विपक्ष और वकील है, भ्रम की स्थिति है। हालांकि, कार्य-व्यवहार और बोल के लगातार विश्लेषण से इनके माइंडसेट का पता चल ही जाता है। कश्मीर पर देश विरोधी बयानबाजी से लेकर मोदी सरकार के कई फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले प्रशांत भूषण का चेहरा आइने की तरह साफ है। विपक्ष विहीन राजनीति में ‘अफलातून’ प्रशांत भूषण का बर्ताव विपक्षी पार्टी के नेता की तरह है। अक्सर अपने को वामपंथी बुद्धिजीवी समझने वाले संघ या बीजेपी के खिलाफ स्वयं को नेता मानने लगते हैं। वकील से नेता और नेता से फिर वकील बने प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार के एक और फैसलेके विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

देश की अति महत्वपूर्ण जांच एजेंसी सीबीआई में बड़े अधिकारियों के बीच खींचतान और भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए केंद्र सरकार ने मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से रिश्वत मामले में फंसे स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना के साथ ही निदेशक आलोक वर्मा को भी छुट्टी पर भेज दिया है। सीबीआई के दोनों वरिष्ठ अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार ने यह फैसला किया। राकेश अस्थाना की गिरफ्तारी पर फिलहाल हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इन सबके बीच, केंद्र सरकार ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक का जिम्मा सौंपा है। सरकार के इसी फैसले के खिलाफ प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

CBI

इससे पहले, भीमा कोरे गांव की घटना और पीएम मोदी के मारने की साजिश में आरोपी शहरी वामपंथी गिरोहों को बचाने के लिए प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। इससे पहले प्रशांत भूषण 1993 के मुंबई धमाके के दोषी आतंकी को फांसी से बचाने को आधी रात सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

सीबीआई मामले में प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए निदेशक आलोक वर्मा को हटाने को गैरकानूनी करार दिया और कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

हालांकि, ये वही प्रशांत भूषण हैं जिनके पिता ने आम आदमी पार्टी की स्थापना में एक करोड़ रुपए का चंदा दिया था और दिल्ली का सीएम बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रशांत भूषण के पिछवाड़े पर लात मारकर पार्टी से बाहर कर दिया (उस दौरान सामने आई बातचीत में केजरीवाल ने पिछवाड़े पर लात मारकर निकालने की बात कही थी)। तब प्रशांत भूषण केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को लेकर कोर्ट नहीं गए, चुपचाप बाहर हो गए।

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दरअसल, प्रशांत भूषण व केजरीवाल समान रूप से वामपंथी विचारधारा से संबद्ध रहे हैं। अक्सर वामपंथी एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बाद भी उनपर तबतक विरोधी या वैचारिक हमला नहीं करते, जबतक उनमें से कोई संघ या बीजेपी से न मिल जाए या फिर उनकी विचारधारा में चलता न दिखे। यदि, केजरीवाल बीजेपी या संघी विचारधारा के साथ दिखाई देंगे तो सबसे पहले उनपर प्रशांत भूषण ही हमला करते दिखेंगे।

बहरहाल, सीबीआई के दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने को केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन माना जा रहा है। सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव ने पद संभालते ही सीबीआई मुख्यालय के 10वें व 11वें फ्लोर को सील कर दिया है। साथ ही, विभागीय स्तर पर भी कई बदलाव किए हैं। अरुण शर्मा को जेडी पॉलिसी, जेडी एंटी करप्शन हेडक्वार्टर से हटा दिया गया है। एसी-तृतीय के डीआईजी मनीष सिन्हा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। राकेश अस्थाना के मामले को फास्टट्रैक इन्वेस्टिगेशन में भेज दिया गया है।

 

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