किसी कहानी की तरह हादसे को भुलाने में लगी पंजाब सरकार

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अमृतसर प्रशासन की ओर से मौत के घोषित आंकड़े के बावजूद लोगों के परिजन नहीं मिल रहे। शनिवार को दूर तक रेल की पटरी की खाक छान रहे लोग 

पंजाब सरकार ने एफआईआर दर्ज की मगर कोई आरोपी नहीं, यूं हीं हादसे को भुलाने की कोशिश में प्रशासन व सरकार

हादसे के बाद अपने को खाने पर बिलख रहे लोग।  amritsar-train-accident
रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।
नई दिल्ली। दशहरा को देर शाम अमृतसर में जो कुछ हुआ वह सरकार और प्रशासन जैसी किसी व्यवस्था के नाम पर तमाचा और अंधेरगर्दी की इंतहा है। यह घटना यह भी बताती है कि लोकतंत्र के नाम पर आईपीएस और आईएएस का चोला-टोपी पहनने वालों की नज़र में देश में आम आदमी की औकात भेड़-बकरी से ज्यादा कुछ नहीं है। ये केवल विधायक, मंत्रियों और सरकार में बैठे लोगों की सलामी बजाते हैं, उसी के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं। वैसे भी कांग्रेस के राज में सिस्टम की बात करना हमेशा से बेमानी रहा है। यहां बस, जो ‘राजा’ है वही नियम और कानून है।
शुक्रवार को अमृतसर में जहां रावण का दहन का वहां प्रशासन से इजाजत लेने-देने जैसी कोई चीज़ की जरूरत नहीं थी। घटना के बाद अंदरखाने सारे कागजात बनाए जा रहे होंगे, कारण की उसी स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसमें कोई आरोपी नहीं है। सरकार के मंत्री और कांग्रेस के नेता कार्यक्रम के आयोजक थे और शामिल हुए। छोटे से ग्राउंड के बाहर व रेलवे ट्रैक पर करीब 10 हजार लोगों की भीड़ थी लेकिन सुरक्षा के लिए कोइ पुलिस का जवान मौके पर नहीं था।
अमृतसर में घटनास्थल रेलवे ट्रैक पर शनिवार को लोगों की भीड़। ↓amritsar train acciden Saturday morning
अब जबकि, इतनी बड़ी घटना हो गई, पंजाब सरकार और प्रशासन ने मामले में लीपापोती शुरू कर दी है। एफआईआर में किसी को आरोपी नहीं बनाया जाना इसका सबूत है। माना जा रहा है कि शुद्ध रूप से यह कार्यक्रम लोकसभा चुनाव की राजनीति को देखते हुए आयोजित किया गया था और इसके पीछे कांग्रेस के नेता व विधायक सिद्धू थे।
जब यह घटना हुई, नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर घटनास्थल पर ही थी लेकिन वह मौके से निकल गईं। बाद में मीडिया में जवाब दिया कि उनके घर आने व घटना के 15 मिनट बाद जानकारी मिली। साथ ही, वह यह बताने लगीं कि रावण दहन का कार्यक्रम वहां कई सालों से होता रहा है। उनके पास इसका कोई जवाब नहीं कि हर साल तो ऐसी घटना नहीं घटी। मतलब कि और दिनों में आयोजक और प्रशासन कुछ तो ऐसा कुछ करते होंगे कि ऐसी घटना नहीं घटी।
ऐसी हृदय विदारक घटना के होने में जो बातें सामने आ रही है, वह रावण दहन का समय को लेकर है। इससे पहले रावण दहन शाम छह बजे से पहले संपन्न हो जाता था। उस समय गोधुलि की बेला में लोगों को अपने आसपास सब दिखता था। लेकिन, इस बार रावण दहन के कार्यक्रम में दो घंटे का विलंब हुआ और वह भी नवजोत कौर के विलंब से आने के चलते हुआ। नवजोत कौर समारोह में साढ़े सात बजे के करीब पहुंची। देर से पहुंचने के बाद भी उन्होंने पहले लंबा भाषण दिया। तब तक मैदान और आसपास घोर अंधेरा छा गया था। समारोह से करीब 50 मीटर की दूरी पर ही केवल जलते रावण की लपटें दिखाई और पटाखों की आवाजें ही सुनाई दे रही थी। समारोह में देरी, आसपास अंधेरा और पटाखों की आवाजों ने इस घटना को अंजाम देने में अपनी भूमिका निभाई।
शनिवार को सुबह से ही लोग रेलवे पटरियों के किनारे दूरी तक अपने के चिन्ह तलाशने में लगे हुए हैं। अभी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनका कोई पता नहीं चल रहा है। बड़ी संख्या में आसपास के ऐसे बच्चे भी लापता हैं जो रावण देखने अकेले घर से निकल गए थे।

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