‘रॉफेल और रिलायंस के साथ करार को लेकर राहुल गांधी ने सरासर झूठ बोला’

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राफेल की निर्माता कंपनी दसॉल्ट के सीइओ एरिक ट्रैपियर ने कहा, रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर के बारे में राहुल ने सरासर झूठ बोला।

दसॉल्ट कंपनी के सीइओ एरिक ट्रैपियर।Dassault-CEO-Eric-Trappier

रिपोर्ट4इंडिया डेस्क (एएनआई इनपुट सहित)  

नई दिल्ली। लड़ाकू विमान राफेल को लेकर निर्माता कंपनी दसॉल्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयानों को प्रतिकार किया और कहा कि वे इस मामले में सरासर झूठ बोल रहे हैं। दसॉल्ट के सीइओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप झूठा है।

एरिक ट्रैपियर ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो आरोप लगा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं। राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर के बारे में सरासर झूठ बोला है। एरिक ने कहा, डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है, वह बिल्कुल सही है, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता।

एरिक ट्रैपियर ने बताया कि उनकी कंपनी और कांग्रेस का रिश्ता काफी पुराना है। उनकी पहली डील 1953 में जवाहर लाल नेहरु के रहते हुए हुई थी। भारत में हमारी डील किसी पार्टी से नहीं बल्कि देश के साथ है, हम लगातार भारत सरकार को फाइटर जेट मुहैया कराते हैं।

एरिक ने रिलायंस के साथ करार पर कहा कि हमने जो पैसा इन्वेस्ट किया है वह रिलायंस में नहीं बल्कि ज्वाइंट वेंचर में है। इस वेंचर में रिलायंस ने भी पैसा लगाया है, हमारे इंजीनियर इंडस्ट्रीयल पार्ट को लीड करेंगे। इससे रिलायंस को भी एयरक्राफ्ट बनाने का एक्सपीरियंस मिलेगा।

पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि दसॉल्ट ने रिलायंस को 284 करोड़ रुपये मदद के लिए दिए थे।

एरिक ने साफ किया कि ज्वाइंट वेंचर में 49 फीसदी हिस्सा दसॉल्ट और 51 फीसदी हिस्सा रिलायंस का है। इसमें कुल 800 करोड़ रुपये का इन्वेस्ट होगा, जिसमें दोनों कंपनियां 50-50 की हिस्सेदार होंगी। दसॉल्ट के सीईओ ने कहा कि ऑफसेट को जारी करने के लिए हमारे पास 7 साल थे, जिसमें शुरुआती 3 साल में हम बाध्य नहीं हैं कि ऑफसेट के साथी का नाम बताएं। उसके बाद 40 फीसदी हिस्सा 30 कंपनियों को दिया गया, इसमें से 10 फीसदी रिलायंस को दिया गया।

एरिक ने राफेल के दाम को लेकर कहा कि जो अभी एयरक्राफ्ट मिल रहे हैं, वह करीब 9 फीसदी सस्ते हैं। उन्होंने कहा,जो 36 विमानों की कीमत है वह मौजूदा 18 के बिल्कुल समान है। ये दाम दोगुना हो सकता था, लेकिन ये समझौता सरकार से सरकार के बीच का है इसलिए दाम नहीं बढ़ाया गया, इससे इतर दाम 9 फीसदी सस्ता हुआ। सीईओ ने बताया कि उड़ने के लिए तैयार स्थिति में 36 कॉन्ट्रैक्ट वाले राफेल का दाम 126 कॉन्ट्रैक्ट वाले दाम से काफी सस्ता है।

हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ करार टूटने पर एरिक ने कहा कि जब 126 राफेल विमान के करार की बात चल रही थी, तब एचएएल  से करार की ही बात थी। लेकिन डील सही तरीके से आगे बढ़ती तो करार एचएएल को ही मिलता। लेकिन 126 विमान का करार सही नहीं हुआ इसलिए 36 विमान के कॉन्ट्रैक्ट पर बात हुई, जिसके बाद ये करार रिलायंस के साथ आगे बढ़ा।

उन्होंने कहा, वैसे आखिरी दिनों में एचएएल  ने खुद कहा था कि वह इस ऑफसेट में शामिल होने का इच्छुक नहीं हैं। इससे रिलायंस के साथ करार का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया। एरिक ने कहा,इस दौरान वह अन्य कंपनियों से करार के बारे में भी सोच रहे थे, जिसमें टाटा ग्रुप जैसे नाम शामिल थे। लेकिन उस समय हम निर्णय नहीं ले पाए, बाद में रिलायंस के साथ जाना तय हुआ।

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