खुद ‘लुटिया’ डुबो रहे राहुल, UPA सरकार में भी जेल में थे गिरफ्तार माओवादी

0
11
rahul-baba

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बचकानी हरकतों से कांग्रेस पार्टी का दम निकल रहा है। जिन वामपंथी. माओवादियों को भीमा-कोरेगांव मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वे कांग्रेस के समय में भी गिरफ्तार हुए त और उनके नक्सलियों से संबंध उजागर हुए थे। कांग्रेस के सरकार में गिरफ्तार वरवर राव तो नक्सलियों के साथ संबंध में 17 साल तक जेल में रहा है। ऐसे में राहुल गांधी की वामपंथियों और देशद्रोहियों के साथ मिलकर इस तरह राजनीति करनी कांग्रेस के लिए बेहद भारी पड़ेगा।  

rahul-baba

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी हैरान करने वाला है। इससे साफ हो गया कि वामपंथियों माइंडेड वकीलों की याचिका पर रात हो या दिन हर समय सुनवाई को तत्पर सुप्रीम कोर्ट में इस विचारधारा को फॉलो करने वाले जजों की कमी नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक जज का इस मामले में तल्ख टिप्पणी का असर न तो महाराष्ट्र पुलिस पर पड़ा है और न ही सरकार पर। मामले में महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि उसके पास पूरे सबूत हैं। आरोपियों को रिमांड पर लेकर हम इस मामले में कइ नए खुलासे करेंगे।

उधर, महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि है राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वालों पर नकेल कसना ही लोकतंत्र की रक्षा है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने टिप्पणी की थी कि विरोधी विचारों को दबाना लोकतंत्र को खत्म करने जैसा है।

बहरहाल, गिरफ्तार आरोपियों को भले ही मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में पेश कर वामपंथी सहित राहुल गांधी हाय-तौबा मचा रहे हैं लेकिन आरोपियों के नक्सलियों के साथ नजदीकी संबंध जगजाहिर रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में से कई पहले भी जेल जा चुके हैं। यही नहीं, राहुल गांधी जो आज आरोपियों के पक्ष में बोल रहे हैं, उनकी ही सरकार के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उनके संगठनों पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा था।

मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो गिरफ्तार आरोपियों के भीमा कोरेगांव हिंसा और प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश में शामिल होने का सबूत पुणे पुलिस को अदालत में पेश करना है। परंतु, मामले में अभी तक जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन सभी का नक्सलियों के साथ संबंधों से कोई इनकार नहीं कर सकता है।

हैदराबाद से गिरफ्तार वरवर राव को आंध्र प्रदेश पुलिस पहले भी नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। यही नहीं, एक बार आंध्र प्रदेश सरकार के साथ बातचीत के लिए नक्सलियों ने वरवर राव को अपना प्रतिनिधि भी बनाया था। वरवर राव को 1986 के रामनगर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तारकिया गया था और उसे 17 साल बाद 2003 में रिहा किया गया था। 19 अगस्त 2005 को आंध्र प्रदेश सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत राव को फिर से गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जहां से 31 मार्च 2006 को राव जेल से निकला।

इसी तरह से अरुण फरेरा और वरनान गोंजाल्विस को इसके पहले 2007 में भी नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है और कई साल जेल की सजा भी काट चुके हैं।

गृह मंत्रालय के नक्सल प्रबंधन विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान ऐसे नक्सलियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। इसी सिलसिले में दिल्ली में छिपे कोबाड गैंडी को गिरफ्तार किया गया था, जो अभी भी जेल में है। नक्सली हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जी साईबाबा को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल हुए थे।

इसी तरह से जेएनयू के छात्र हेम मिश्रा को नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। यही नहीं, संप्रग सरकार के दौरान गृह मंत्रालय ने पूरे देश में फैले 128 संगठनों की पहचान की थी, जो मानवाधिकार व दूसरे छद्म गतिविधियों की आड़ में नक्सली हिंसा को बढ़ावा देने में जुटे थे।

भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में जून से लेकर अब तक जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनसे से सात इन्हीं संगठनों से संबंधित हैं। इनमें बरबर राव, सुधा भारद्वाज, सुरेंद्र गाडलिंग, रोना विल्सन, अरुण फरेरा, वरनोन गोंजाल्विस और महेश राऊत शामिल हैं। शहरी नक्सलियों के खिलाफ ताजा कार्रवाई सिर्फ भीमा-कोरेगांव हिंसा तक सीमित नहीं है बल्कि, वे प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश भी रच रहे थे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here