संवैधानिक बेंच में भी राम मंदिर केस लटकाने की कोशिश, सुनवाई टली  

0
54
suprime-court-ramjanm Bhoomi

अब, मुसलिम पक्षकार की ओर से केस को लटकाने का काम कपिल सिब्बल के स्थान पर  वकील राजीव धवन ने अपने हाथ में लिया। राजीव धवन ने सुनवाई टालने के लिए पीठ के वरिष्ठ जज यूयू ललित पर सवाल खड़ा किया। सुनवाई 29 जनवरी तक के लिए टली

सवाल उठाए जाने के बाद गठित संवैधानिक पीठ से जस्टिस यूयू ललित ने अपने आप को अलग किया। फिर से तय होगा बेंच में  शामिल जजों की नई सूची 

suprime-court-ramjanm Bhoomi

मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया। 

नई दिल्‍ली। अयोध्या रामजन्म भूमि मामले में कांग्रेस  की शह पर मुसलिम पक्षकार की ओर से सुनवाई टालने की कोशिश जारी है। इससे पहले मुसलिम पक्षकार की ओर से पेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व वकील कपिल सिब्बल ने मामला 2019 लोकसभा चुनाव के बाद तक टालने की अपील की थी। अब इसी मामले में कपिल सिब्बल के साथी वकील राजीव धवन ने नई बेंच के जज पर सवाल खड़े किए। कपिल सिब्बल और दुष्यंत दबे के साथ ही मुसलिम पक्ष की ओर से राजीव धवन राम मंदिर का विरोध कर हैं। यहां तक राजीव धवन ने पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने कोर्ट में बेअदबी की थी और कोर्ट रूम में जोर-जोर से बोलने लगे थे। तत्कालीन जीच जस्टिस के टोकने पर इस तथाकथित बुद्धिमान वकील राजीव धवन ने अदालत में ही वकालत से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी।

भरी सभा में वकालत से संन्यास लेने की घोषणा करने वाले राजीव धवन आज सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश हुए और संवैधानिक पीठ के पांच न्यायाधीशों में शामिल न्यायमूर्ति यूयू ललित पर सवाल खड़ा किया। धवन ने कहा, यूयू ललित  1994 में कल्याण सिंह के वकील रह चुके हैं। सुनवाई से इतर संविधान पीठ पर सवाल उठाने का एकमात्र कारण किसी तरह  इस मामले को सुनवाई से रोकना है ताकि लोकसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर कुछ भी न हो।

गौरतलब है कि अयोध्या में विवादित ‘ढांचा’ गिराने वाले को ‘हिन्दू तालिबानी’ बताने वाले वाले राजीव धवन स्वयं की घोषणा के बाद भी वकालत नहीं छोड़ने का दम नहीं दिखा सके। परंतु, उनके द्वारा सवाल खड़ा करते ही जज यूयू ललित ने संविधान पीठ से अलग होने की घोषणा कर दी।

आज की सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस रंजन गोगाई ने कहा कि सिर्फ हम सुनवाई की तारीख तय कर रहे हैं। राजीव धवन द्वारा यूयू ललित पर सवाल खड़े करने पर चीफ जस्टिस ने बाकी जजों के साथ मशविरा किया। इस पर जस्टिस यूयू ललित ने सुनवाई से अपने आप को अलग करने की बात कही। लेकिन, जैसे ही यूयू ललित अपने को इस मामले से अलग करने की बात कही, राजीव धवन ने कहा कि मुझे अफसोस है, क्‍योंकि इस तरह के मसले को उठाना ठीक नहीं लगता। यानी धवन ने पहले सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज के तटस्थता पर सवाल खड़ा किया और फिर बाद में इसपर अफसोस जताने का प्रयास किया।

अब जस्टिस ललित के बेंच से हटने पर अयोध्‍या मसले पर एक नई संवैधानिक बेंच का गठन होगा और इसपर अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

यानी, इस मामले को लटकाने का भरपूर प्रयास जारी है। सार्वजनिक रूप से मुसलिम पक्षकार जो आपसी बातचीत से मुद्दे का हल से असहमति जताते हुए कोर्ट का फैसला मानने की बात करते हैं, वे केस को लगातार टालने की कोशिश कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here