संगम तीरे : विधि-विधान से माघ पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास पूर्ण

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प्रयागराज में पवित्र संगम में एक करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना। गंगा के किनारे पवित्र शहरों-धार्मिक स्थलों ऋषिकेश, हरिद्वार, शुकताल, गढ़मुक्तेश्वर, विन्धयांचल, वाराणसी, बक्सर, पटना, गंगासागर आदि में भारी संख्या में श्रद्धालु कर रहे पवित्र स्नान, आज माघ का अंतिम दिन, कल से शुरू फाल्गुन मास

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रिपोर्ट4इंडिया/ धर्म-संस्कृति डेस्क।

नई दिल्ली। प्रयागराज में एक माह से अधिक समय से चल रहे कुंभ मेला का आज अंतिम पवित्र स्नान है। विधि-विधान के साथ माघ पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ ही तीर्थराज प्रयाग में गंगा की रेती से कल्पवास कर रहे साधु-संत और गृहस्थ अपने-अपने धाम को प्रस्थान करेंगे। प्रयागराज में आज करीब डेढ़ करोड़ लोगों के पवित्र गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती में स्नान करने की उम्मीद है। प्रयागराज सहित देश की पवित्र नदियों के किनारे धार्मिक शहरों में रात 12 बजे से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे थे।

सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा के स्नान-दान का बहुत अधिक महत्व है। माघ के शुरू होते ही प्रयागराज में संगम तीरे कल्पवासी कल्पवास शुरू करते हैं और माघ पूर्णिमा को कल्पवास संपन्न होता है। इस दिन कल्पवासी सूर्योदय से पहले संगम में स्नान कर पवित्र मां गंगा की आरती-पूजन के बाद सामर्थ्य के अनुसार साधु, सन्यासियों, ब्राह्मणों और गरीबों को दान करते हैं। इसके बाद वे अपनी कुटिया में यज्ञ व हवन कर अपने-अपने निवास को लौट जाते हैं।

हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक माघ पूर्णिमा पर स्नान के बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करना फलदायी होता है। धर्म-शास्त्रों के मुताबिक इस दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन पितरों को भी याद कर उन्हें जल प्रदान करना चाहिए। माना जाता है कि इस पवित्र दिन को देवता भी पृथ्वी पर मनुष्य रूप में उतरकर पवित्र गंगा में स्नान कर मानव कल्याण के लिए उन्मुख होते हैं।

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