उत्तर… साधे न सधीं, फिर …दिल्ली दरबार

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2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री व दिल्ली की लगातार तीन टर्म मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को ब्राह्मण कार्ड के रूप में पार्टी की तरफ से सीएम उम्मीदवार घोषित कर लखनऊ भेजा। परंतु, प्रशांत किशोर (पीके) ने उत्तर प्रदेश में दो बच्चों को एक साथ लाकर शीला दीक्षित को कमज़र्क बना दिया। उसके बाद वे प्राय: नेपथ्य में ही रहीं।  परंतु, 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर उन्हें एकबार फिर से दिल्ली में पदास्थापित किया गया है।  

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित (फाइल फोटो)shila-rahul

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। दिल्ली की वरिष्ट कांग्रेस नेत्री शीला दीक्षित को एकबार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। कांग्रेस ने एकबार फिर से उन्हें दिल्ली प्रदेश की कमान सौप दी है। हालांकि, पूर्व अध्यक्ष माकन के इस्तीफे के बाद ही शीला दीक्षित के नाम पर चर्चा चल रही थी।

 लगातार तीन टर्म यानी 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को यह जिम्मेदारी प्रदेश में पार्टी के भीतर मचे अंतर्कलह को पाटने के लिए की गई है। यही कारण है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष तो शीला दीक्षित होंगी परंतु, डॉ. योगानंद शास्त्री, देवेन्द यादव, हारून यूसुफ और राजेश लिलोठिया को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।

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