पीएम मोदी की हत्या की साजिश मामले में वामपंथी विचारकों को राहत नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वामपंथी विचारकों पर केस राजनीतिक नहीं आपराधिक मामला, दखल से इनकार

वामपंथी विचारक अरुण फेरेरा (पीटीआई फोटो)नज़रबंद वामपंथी विचारक अरुण फेरेरा। 

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव हिंसा व पीएम नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश में वामपंथी विचारकों को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि गिरफ्तारी का मामला राजनीतिक नहीं है। यानी साफ है कि आपराधिक मामले में  तथाकथित वामपथी की गिरफ्तारी बेवजह नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र पुलिस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ाए।  इसके साथ ही, कोर्ट ने पांचों कार्यकर्ता की तत्काल रिहाई और एसआईटी जांच की मांग को भी खारिज़ कर दिया है। हिंसा और पीएम को मारने की साजिश में शामिल गिरफ्तार वरवरा राव, अरुण फरेरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा 29 अगस्त से अपने-अपने घरों में नजरबंद हैं।

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इस मामले में जस्टिस खानविलकर ने कहा कि आरोपी तय नहीं कर सकते हैं कि कौन-सी एजेंसी उनकी जांच करे।

मामले गठित बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर से जस्टिस चंद्रचूड़ ने अलग राय दिया। उन्कहोंने कहा विपक्ष की आवाज को सिर्फ इसलिए नहीं दबाया जा सकता है क्योंकि वो आपसे सहमत नहीं है। उन्होंने एसआईटी गठित करने की वकालत की।

उल्लेखनीय है कि वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक और देवकी जैन, समाजशास्त्र के प्रोफेसर सतीश देशपांडे और मानवाधिकारों के लिए वकालत करने वाले माजा दारुवाला की ओर से दायर याचिका में इन गिरफ्तारियों के संदर्भ में स्वतंत्र जांच और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की गई थी।

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