देश को ‘बदला’ अभिनंदन आशय समझना होगा 

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country with the trash-grabbing gang

आ रही हिमालय से पुकार, है उदधि गजरता बार-बार
प्राची पश्चिम भू नभ अपार, सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत- वीरों का कैसा हो बसंत

” भारत में कांग्रेसी-वामपंथियों की जुगलबंदी के चलते लंबे समय तक भारत के सत्ता-संसाधनों का मज़ा उठाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी, पत्रकार- कलाकार-अभिनेता, अलगाववादी आजकल पाकिस्तान से शांतिवार्ता को लेकर अभियान चला रहे हैं, इमरान खान की वाहवाही कर रहे हैं। दरअसल, ये टूकड़े-टूकड़े गैंग के मास्टरमाइंड हैं, जो सत्ता से बेदखल होने पर देश के खिलाफ पाकिस्तान का समर्थन में हर स्तर पर खड़े दिखते हैं।”

मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4ंइंडिया।

नई दिल्ली। एकबार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईशारों ही ईशारों में संकते दिया है कि बदले की आग बुझी नहीं है। जो यह समझ रहे हैं कि भारत ने विंग कमांडर अभिनंदन के आने के बाद अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। भारत में कांग्रेसी-वामपंथियों की जुगलबंदी से लंबे समय तक देश के सत्ता-संसाधनों का मज़ा उठाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी, पत्रकार, कलाकार-अभिनेता और श्रीनगर के अलगाववादी और नेता आजकल पाकिस्तान से शांतिवार्ता को लेकर अभियान चला रहे हैं।, इमरान खान की वाहवाही कर रहे हैं। दरअसल, ये सभी टूकड़े-टूकड़े गैंग के मास्टरमाइंड हैं, जो सत्ता से बेदखल होने पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान का समर्थन में हर स्तर पर खड़े दिखते हैं।

दरअसल, यह कोई आज की बात नहीं है। धर्म के नाम पर देश विभाजन के बाद हर हाल में नेहरू के हाथ में सत्ता देने की कोशिश और उसे लंबे समय तक बनाए रखने का काम इन्हीं वामपंथी-कांग्रेसी बुद्धिजीवियों-पत्रकारों के जिम्मे था।  नेहरू के प्रधानमंत्रित्व में देश में सरकारी विभागों, अकादमियों, विश्वविद्यालयों, लोकसेवा आयोगों, शोध संस्थानों, आर्थिक संस्थानों, सूचना तंत्रों का गठन हुआ तो उन सभी संस्थानों में इन्हें भर दिया गया। इन नेहरूवादी वामपंथियों-कांग्रेसी बुद्धिजीवियों-पत्रकारों का काम भारत में मुसलमानों को हिन्दुओं का भय दिखा, कांग्रेस के हक में वोट बैंक समूह बनाकर उन्हें एकजुट करना था। इसीलिए एनडीटीवी के रवीश कुमार की नज़र विंग कमांडर अभिनंदन की गिरफ्तारी और टॉर्चर पर भारत सरकार के कड़ा रूख और तीनों सैन्य अधिकारियों की तैयारी पर नहीं, पाकिस्तान में ‘अमन की आशा’ वाले समूहों के बनाए तख्तियों और राहत इंदौरी के शायरी पर था, जो मोदी के खिलाफ गढ़े इनके शब्दों की चाल पर मतवाला हो जाते हैं। साथ ही, रवीश कुमार आजकल अपनी ‘बिरादरी’ और ‘संप्रेषण’ में yEबदलाव को कोसते हुए खान को शांति योद्धा बताने और साबित करने में नायक की भूमिका में खड़े दिखाई देते हैं।

बहरहाल, आज एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने फिर अलंकारों में बात किया और कहा कि आज अभिनंदन का अर्थ ‘बदला’ है। इससे पहले भटनागर शांति पुरस्कार के दौरान ईशारों में पायलट प्रोजेक्ट की बात कही थी। निश्चित रूप से बदले की कार्रावाई का पाकिस्तान ने ‘अभिनंदन’ किया और भारतीय पायलट को छोड़ने की घोषणा कर दी।

पाक सेना और आईएसआई जानते हैं कि भारत में फिलहाल उनके शुभचिंतकों की सत्ता नहीं है। आईएसआई को भारत से जितनी भी मदद मिलने की उम्मीद है, ऐसे छद्म समूहों से ही है, जो भारत की राजधानी के एक बड़े विश्वविद्यालयों में भारत तेरे टूकड़े होंगे, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं और उनके समर्थन में वहां पहुंचकर उऩका समर्थन और हौंसला बढ़ाते हैं। इनमें पुरस्कार वापसी गैंग के भी सदस्य है। इसीलिए पाकिस्तान कहता है कि अगली सरकार जब उसके समर्थों की बनेनी तभी भारत से बातचीत हो पाएगी।

आगे देश की जनता के हाथों में कमान होगा कि वे चुनाव में पाकिस्तान की करतूतों का जवाब देने वाली सरकार चुनेंगे या फिर पाकिस्तान समर्थकों की।

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