क्या ‘वेटिकन’ भी नन से रेप मामले को दबाने का करेगा प्रयास!

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Nun demonstrations about the rape case

विशप द्वारा केरल के चर्च में नन से रेप करने का मामला भले ही वेटिकन पोप के पास पहुंच गया है लेकिन सवाल है कि आधुनिक सूचना-तकनीक व संचार के युग में मामला बीते 75 दिनों से चल रहा है और इतने दिनों तक पोप को औपचारिक शिकायत का इंतजार था। अब, इंतजार इसका है कि शिकायत के बाद भी रेप केस और आरोपी विशप के बारे में कुछ न कह अगले साल फरवरी में ‘समग्र बैठक’ करने की बात पोप के स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं।

कोच्चि में प्रदर्शन करतीं ननNun demonstrations about the rape case

मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया डेस्क। 

नई दिल्ली। केरल के कुराविलांगद के एमजे मिशन होम में एक 43 साल की नन से विशप द्वारा रेप की शिकायत वेटिकनमें पोप को दी गई है। रेप की शिकायत के 75 दिनों बाद भी विशप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित नन डरीं हुई है और अपने को कमरे में कैद कर लिया है। हालांकि, कोचचि में पांच ननों द्वारा इस मामले में रैली निकालकर पीड़ित के साथ खड़े होने और इस जघन्य अपराध के खिलाफ अलख जगाई है।

उधर, आरोपी जालंधर के विशप फ्रैंको मुलक्कल अभी भी मामले को दबाने के प्रयास में लगा है। पीड़ित के परिवार के मुताबिक उन्हें मामला बंद करने के लिए 5 करोड़ रुपए देने का ऑफर दी गई।

Bishop-Franco-Mulkkal

← बिशप फ्रैंको मुलक्कल

अब जबकि इस मामले की औपचारिक शिकायत पोप को की गई है तो फिलहाल पोप की ओर से विशप को लेकर कोई कार्रवाई की जगह मात्र चर्चों में रेप के मामले को फरवरी में दुनिया भर के विशपों की बैठक बुलाने की बात कही गई है। साफतौर पर पोप की तरह से फिलहाल यह मामला लटकाने जैसा प्रतीत होता है।

जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ रेप का केस करनेवाली नन ने इसके लिए लंबा संघर्ष किया और उनके संघर्ष की तक पहुंची।

पीड़िता की बहन जो कि एक नन हैं ने इस बारे में कहा है कि ‘शिकायत के 75 दिन से अधिक हो गए हैं। अब तक उससे पांच बार मैराथन पूछताछ हो चुकी है। लेकिन, विशप पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।  पीड़ित इस वक्त बेहद तनाव में है और कमरे से बाहर निकलने व लोगों से मिलने से भी डर रही है।’ उन्होंने कहा, मेरी बहन (पीड़ित नन) को समर्थन करनेवाली ननों की सुरक्षा को लेकर भी वह चिंतित है। प्रभावशाली बिशप के खिलाफ यह लड़ाई बेहद मुश्किल है, इसका अंदाजा उन्हें व समर्थन करनेवाली ननों को है। केरल के एर्नाकुलम जिले के गांव कोडनाड का रहनेवाला इस परिवार ने कहा है कि हम न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।

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