राम ही केवल प्रेम प्यारा…

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सबके राम, सबके लिए राम

भगवान श्रीराम का पूरा अस्तित्व ही प्रेम, शांति और सौहार्द के प्रति समर्पित रहा है। वे अपनी मातृभूमि और अपने सभी लोगों के लिए हर पल चिंतित रहते हैं। आज अयोध्या केस को लेकर जो भी फैसला आएगा, उसे पूरे देशवासी भगवान राम के प्रेम के अनुराग  ही अनुसरण करेंगे। फैसले के मद्देनज़र रिपोर्ट4इंडिया की अपील कि सभी पाठक हर हाल में प्रेम, शांति, भाईचारा का अनुसरण करेंगे।

डॉ. मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा और दर्शन के अनुरागी स्व. विद्या निवास मिश्र लिखते हैं कि न जाने तुलसीदास दास के भीतर वह कौन-सी आग धधकी कि वे वियोगी और रामानुरागी बन गए। भक्तिकाल का वह पूरा दौर धर्म, सत्य और प्रेम-संदेश के प्रसार में ही खप गया, तुलसी स्वयं एक व्यापक संदेश को लेकर इसमें खप गए और आज करीब चार सौ साल तक भारतीय समाज में एकता, प्रेम और सौहार्द के साथ सद्गति की घटाटोप आज तक नहीं छट सकी।

“रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जानहि हारा। ‘हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होई मैं जाना।’ मन में निश्छल प्रेम नहीं तो फिर राम की प्राप्ति कहां? राम को प्राप्त करने का एकमात्र आधार प्रेम है। सबरी, भील, केवट, जनजाति, जटायू, निराश्रित राम ने सबका हाथ पकड़ा, सबके भीतर प्रेम, सम्मान व एका का भाव भरा। सब में राम और सबके राम ने इस देश को बड़ी सांस्कृतिक ताकत दी है।

शंकराचार्य कहते हैं…आत्मा सत्य है तो मनुष्यत्व भी सत्य है, जिसकी कभी मौत नहीं हो सकती। जो भी लोग दूसरे को भयभीत करते हैं, वे असत् के पथ पर चलने वाले हैं, वे ईश्वर के अनुयायी नहीं हो सकते।

इसीलिए राम के प्रियजन फैसला जो भी हो, जो कुछ भी हो, राम के अनुगामी बनकर उसे सिरोधार्य करें।

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