तुम बिनु जियत बहुत दिन बीते…हां रघुनंदन प्राण पिरीते!

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श्रीराम मंदिर, अयोध्या।

गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं, मात्र राम से बिछड़ने के कुछ घंटे ही राजा दशरथ को बहुत दिन बीतने का अहसास कराया। राम मंदिर को लेकर ठीक वहीं स्थिति राम परायण दुनिया के समस्त हिन्दुओं के लिए आज से पहले थी। राम भक्तों को राम मंदिर के बिना बहुत दिनों तक रहना पड़ा। आज निर्माण का नींव पड़ने जा रही है और पूरा देश उत्साहित व आह्लादित है। 

डॉ. मनोज कुमार तिवारी@Report4india.com

याद कीजिए तो श्रीरामचरितमानस में वर्णित यह प्रसंग इच्क्षवाकु वंश के प्रतापी सम्राट दशरथ की मार्मिक व्यथा है, जो अपने प्रिय पुत्र श्रीराम के वियोग में मर्माहत हैं। माता की इच्छा और पिता के वरदान की जानकारी मिलने के साथ ही राम ने वन जाने का फैसला किया। पिता दशरथ राम को वन जाने से मना करते रहे परंतु राम ने हर्षित मन से पिता के बचन का मान रखने के लिए भाई लक्ष्मण और पत्नी जानकी के साथ वन के लिए निकल गए। राजा दशरथ ने अपने मंत्री सुमंत से कहा कि आप राम को वन से घुमाकर वापस ले आएं परंतु, राम ने वापस लौटने से मना करते हुए सुमंत को वापस भेज दिया।

सुमंत को राम के बिना वापस अयोध्या लौटने की सूचना के साथ ही राजा दशरथ शोक में पूरी तरह ढूब गए। राम से बिछड़ने के मात्र दो दिन ही उन्हें युगों के समान लगा और राम-राम कहते हुए प्राण त्याग दिए। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं, मात्र राम से बिछड़ने के कुछ घंटे ही राजा दशरथ को बहुत दिन बीतने का अहसास कराया। राम मंदिर को लेकर ठीक वहीं स्थिति राम परायण दुनिया के समस्त हिन्दुओं के लिए आज से पहले थी। राम भक्तों को राम मंदिर के बिना बहुत दिनों तक रहना पड़ा। आज निर्माण का नींव पड़ने जा रही है और पूरा देश उत्साहित व आह्लादित है।

कोरोना के इस महाविपदा में हिन्दू समाज भले ही अयोध्या में अपने आप को दैहिक रूप से न पाकर व्यथित है परंतु, उसके अंदर एक गज़ब का उत्साह है। आज राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखे जाने का अवसर मन को सुखद अनुभूति प्रदान कर रहा है। आज … ‘सियाराम मैं सब जाग जानि’ का भाव सर्वत्र है, एक गहरा सुकून है, आनंद है।

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