काबुल पर कब्जा, …तालिबान आमंत्रित

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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल।

“जिस अफगान सरकार व वहां की सेना को दो दशक से अमेरिका व अन्य देश पैसा व प्रशिक्षण  दे रहे थे और ये सभी  तालिबान के खात्मे को बढ़चढ़ कर बोल रहे थे, वे लड़ाई के वक्त बेहद कमजोर साबित हुए। बिना लड़े ही तालिबान के सामने सरेंडर कर गये।”

Manoj Tiwari @report4india/ New Delhi.

तालिबान आंतकी समूह ने 15 अगस्त को अफगानिस्ता की राजधानी काबुल को अपने आगोश में ले लेने को तैयार है। जिस अफगान सरकार व वहां की सेना ने दो दशक से अमेरिका व अन्य देशों से पैसा व प्रशिक्षण लेकर तालिबान का खात्मा करने के लिए बढ़चढ़ कर बोल रहे थे वे, लड़ाई के वक्त बेहद कमजोर साबित हुए। वे बिना लड़े ही तालिबान के सामने सरेंडर कर गये। अफगानिस्तान सरकार के संचार मंत्री ने घोषणा की है कि उनकी सरकार ने सरेंडर कर दिया है। उधर, विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सोहेल शाहीन ने कहा कि काबुल पर हम आराम से कब्जा चाहते हैं।

फिलहाल स्थिति यह है कि अफगानिस्तान सरकार के कइ मंत्री और संसद के अध्यक्ष देश को छोड़ चुके हैं। लाखों के संख्या में काबुल निवासी सड़कों व गलियों में डर के मारे इधर-उधर भाग रहे हैं। फिलहाल, काबुल की सड़कों पर  तालिबान के लड़ाके हथियारों सहित इधर-उधर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि, किसी को भी यह आभास नहीं था कि अफगानिस्तान की सरकार और फौज इतनी जल्दी हार मान लेगी। फिलहाल, काबुल से अमेरिकी और अन्य युरोपीय देशों के लोग बाहर निकलने की कोशिश में लगे हुए हैं। काबुल के आसमान में धुएं व चिनुक जैसे हेलिकाप्टर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। अफगानिस्तान के वर्तमान हालात को लेकर अमेरिका व राष्ट्र संघ की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हुई है।

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