Congress Toolkit : ‘जो तय था, वैसा ही किया’ तो FIR का ‘अतिशय डर’ …कुछ कहता है

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संबित पात्रा- राहुल गांधी (डिजाइन)

“कांग्रेस को इसकी चिंता उतनी नहीं है कि बीजेपी इस मुद्दे को कहां तक लेकर जाएगी और उससे कांग्रेस को कितना नुकसान होगा। कांग्रेस खासकर राहुल और सोनिया गांधी को ज्यादा चिंता इस बात की है कि कांग्रेस के अंदर से जिसने भी इसे लीक किया है या लीक करने में मदद की है, वह और कितना कुछ मसाला बीजेपी को दिया है या एकत्रित किया है।“

Dr. Manoj kumar Tiwary/Report4india/ New delhi.

कांग्रेस की टूलकिट के एक्सपोज़ हो जाने से ‘राहुल-सोनिया’ सकते में हैं। कांग्रेस को इसकी चिंता उतनी नहीं है कि बीजेपी इस मुद्दे को कहां तक लेकर जाएगी और उससे कांग्रेस को कितना नुकसान होगा। क्योंकि, अब कांग्रेस अपने राजनीतिक नुकसान की चिंता खुद ही नहीं करती है। बंगाल चुनाव से यह साफ हो गया है। कांग्रेस खासकर राहुल और सोनिया गांधी को ज्यादा चिंता इस बात की है कि कांग्रेस के अंदर से जिसने भी इसे लीक किया है या लीक करने में मदद की है, वह और कितना कुछ मसाला बीजेपी को दिया है या एकत्रित किया है। और यह भी कि, राहुल के रास्ते में कांटा बने  पार्टी के दिग्गज नेताओं को बाहर कर देने के बाद ‘भेदिया’ कौन रह गया है। एक डर यह भी कि, बीजेपी ने ‘कांग्रेस टूलकिट नीति संबंधी’ कुछ पार्ट को ही सावर्जनिक किया और कुछ भविष्य के लिए सुरक्षित तो नहीं रख लिया है। संभवना यह भी है कि, यह टूलकिट कहीं चीन जैसे किसी बाहरी शत्रु के निर्देश पर तो तैयार किया गया?

2019 में चुनाव में बुरी तरह से पराजित होने के बाद कांग्रेस के लिए राजनीति का मतलब स्वयं का ‘आत्मचिंतन’ नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी नियंत्रित केंद्र सरकार पर किसी भी बाहरी शत्रु से ज्यादा और नीचता की हद तक जाकर पीछे से वार करना हो गया था। राहुल गांधी की हरकतों में उपरोक्त सबकुछ देखा-समझा जा सकता था। कांग्रेस ने तय कर लिया है कि भले ही उसका सबकुछ लुट जाए परंतु, नरेंद्र मोदी को किसी भी स्तर पर जाकर बदनाम किया जाए। डोकलाम व भारत-चीन सीमा विवाद में राहुल गांधी की पूरी स्ट्रेटजी यही दिखी।

कांग्रेस के कुछ बड़े व पुराने नेता भी पार्टी तथा खासकर राहुल गांधी के नासमझ हरकतों से हतप्रभ रहे। इस पीड़ा में जीने को विवश थे कि आखिर वे अपने समर्थकों को कैसे समझाएं कि राजनीतिक तौर पर कांग्रेस पार्टी का ऐसा बर्ताव क्यों है? वे समझ रहे थे कि राहुल-सोनिया नियंत्रित कांग्रेस पार्टी राजनीतिक धारा की ‘देशी समझ’ पर नहीं चल रही है, इसीलिए उन्होंने विरोधी में कुछ स्वर उठाए।

भला, इस खुलासे से कांग्रेस की इतनी दिक्कत पैदा क्यों होने लगी कि वह दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस को शिकायत दे। जबकि सही तथ्य यह है कि कांग्रेस नेताओं के पिछले कुछ दिनों के ट्वीट इस टूलकिट की स्वीकार्यता को सही होने की ओर इशारा करते हैं। खुद शशि थरूर ने ट्वीट कर इंडियन वैरिएंट का जिक्र किया और यूके में वैक्सीन की दूसरी डोज से तुलना कर भारत सरकार पर हमला करने की कोशिश की। शशि थरूर ने अपने एक दूसरे ट्वीट में टूलकिट में लिखी बातों को पूरी तरह से अंजाम दिया। उन्होंने साफ तौर पर कोरोना के इंडियन वैरिएंट को बीजेपी के कम्युनल रूख से जोड़ा और वायरस के राजनीतिक मायने पैदा करने की कोशिश की।

स्वयं राहुल गांधी ने भी इंडियन वैरिएंट का जिक्र कर इसके स्विटजरलैंड पहुंचने की खबर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की। कांग्रेस का मकसद यह बताता है कि कोरोना  वैरिएंट को मोदी सरकार से जोड़कर सरकार की बदनामी की जाए। इसी तरह कांग्रेसी नेताओं ने टूलकिट के ही मुताबिक कुंभ को कोरोना का सुपर स्प्रेडर बताने की पूरी कोशिश की। कर्नाटक में नेता विपक्ष सिद्धारमैय्या ने इस सिलसिले में पीएम को चिट्ठी तक लिखी और कुंभ को कोरोना से जोड़ा व इसका जिम्मेदार मोदी सरकार को ठहराया। पी. चिदंबरम ने कुंभ की इजाजत का मजाक उड़ाया तो दिग्विजय सिंह ने क्रिकेट के स्टेडियम में सन्नाटे की तुलना कुंभ में लाखों की भीड़ से की। यह सब तो टूलकिट के मुताबिक ही था।

अब बीजेपी कि जिम्मेदारी बनती है कि वह टूलकिट मामले में राहुल हो या फिर सोनिया गांधी कानून के दायरे में लाए और यह सुनिश्चित करें कि ये मगरमच्छ ‘कोर्ट के हाथ’ का सहारा पाकर न छुट जाएं। शिद्दत के साथ ‘कोबरा’ के जहरीले फन को कूचलने का काम किया जाए।

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