पंजाब समस्या और समाधान के प्रयास : कांग्रेस आलाकमान पर चौतरफा दबाव   

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कैप्टन अमरिंदर की कांग्रेस को सीधी चुनौती, मेरा समर्थक बने सीएम अन्यथा फ्लोर टेस्ट को तैयार, सोनिया गांधी को फोन कर बतायी मंशा

Manoj Kumar Tiwary/report4india/ New Delhi.

पंजाब सीएम पद से अमरिंदर सिंह के सामान्य इस्तीफा और कांग्रेस से जुड़े रहने के ऐलान के बाद ऐसा लगता था कि राज्य की समस्या का हल फिलहाल हो गया है। परंतु, 24 घंटे बाद समस्या ने जटिल रूप ले लिया। शनिवार को विधायक दल की बैठक में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाने बाद दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान ने अंबिका सोनी को तत्कालीक सीएम बनाकर चंडीगढ़ भेजने की एक कवायद की। परंतु, अंबिका सोनी के साफ इनकार और पंजाब की कमान किसी सिख समुदाय के हाथ में ही देने के सुझाव ने समस्या को और बढ़ा दिया।

इधर, सुनील जाखड़ के नाम पर नवजोत सिंह सिद्धू गुट की आपत्ति के बाद जिन दो-तीन नामों पर चर्चा चल रही थी, उसे बंद कर दिया गया। उसके बाद दिल्ली में सोनिया गांधी ने विधायक दल से इतर अंबिका सोनी के नाम पर चर्चा शुरू की। सोनी ने स्वास्थ्य का हवाला देकर अपने को सीएम रेस से दूर कर लिया।

उधर, रविवार को सुबह ही कैप्टन ने सोनिया गांधी से बात स्पष्ट तौर पर कहा कि सिद्धू या उनके गुट के किसी भी विधायक के सीएम पद पर दावेदारी का वे विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि स्पष्टत: उनका समर्थक ही होना चाहिए। नहीं तो फिर फ्लोर टेस्ट ही रास्ता होगा। संभवत: शनिवार को कैप्टन ने इस्तीफा देने की बात पर सोनिया गांधी को बता दिया था कि सीएम उनके ही गुट से ही होना चाहिए। इसीलिए उन्होंने विद्रोही रूख अख्तियार नहीं किया और अपने समर्थक विधायकों को विधायक दल की बैठक में उपस्थित होने को भेज दिया।

चंडीगढ़ और दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है। रविवार को 11 बजे दिन में तय विधायक दल की बैठक टल जाने के बाद सारा जोर किसी एक नाम पर सहमति बनाने की है। फिलहाल, चुनाव के दहलीज पर बैठा पंजाब राज्य में कांग्रेस के भीतर सिर-फुटौवल का सर्वमान्य हल ही सबसे बड़ी चुनौती है।

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