बीजेपी के खिलाफ खबरों का संयोजन करता है ‘आजतक’ का न्यूज़ वेवसाइट

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आजतक वेवसाइट पर प्रकाशित एक ही न्यूज़ का कुछ अंतराल में दो हेडिंग। पहले हेडिंग में साफतौर पर गोरखपुर में पंचायत चुनाव में सरकार ने बेइमानी कर हारे हुए उम्मीदवार को जीता दिया। कुछ देर बाद ही हेडिंग को बदल दिया गया।

“आजतक वेवसाइट में खांटी वामपंथी-कांग्रेसी मिज़ाज़ के पत्रकार निष्पक्ष नहीं दिखते हैं। इस वेवसाइट पर ज्यादातर ऐसे हैं जो विपक्ष खासकर कांग्रेस व केजरीवाल पर उठते सवाल से जुडीं खबरें गायब कर देते हैं। या फिर, वैचारिक तौर पर उसे दूसरी तरफ मोड़कर उस खबर की घार को कूंद कर देते हैं।”

डॉ. मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया। 

आजतक न्यूज़ चैनल विज्ञापनों और नंबर वन रैंकिंग के खोने के खतरे को भांपते हुए बीजेपी व केंद्र सरकार से संबंधी खबरों में स्वयं को निष्पक्ष बनाए रखने की कोशिश करता हुआ दिखता हो परंतु, आजतक वेवसाइट में खांटी वामपंथी-कांग्रेसी मिज़ाज़ के पत्रकार निष्पक्ष नहीं दिखते हैं। इस वेवसाइट पर ज्यादातर ऐसे हैं जो विपक्ष खासकर कांग्रेस व केजरीवाल पर उठते सवाल से जुडीं खबरें गायब कर देते हैं। या फिर, वैचारिक तौर पर उसे दूसरी तरफ मोड़कर उस खबर की घार को कूंद कर देते हैं। ऐसा आजतक के टॉप प्रबंधन के सह के बिना संभंव नहीं है।

आजतक ने ‘लल्लन टॉप’ जैसे यू-ट्यूब चैनल पर जेएनयू के आईआईएमसी की ‘वामपंथी आग’ से निकला सौरभ द्विवेदी जैसा खांटी वामपंथी पत्रकार को बीजेपी के खिलाफ जनमत तैयार करने में लगा दिया। यह सौरभ द्विवेदी बनारस जाकर अस्सी घाट पर मुंह ढके कुछ सेलेक्टेड लड़कियों से बीएचयू के महिला वार्डेनों पर शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाता है। परंतु, यह कभी भी जेएनयू के हॉस्टलों में वामपंथियों के नशे में धुत ‘रांड़-सांढ़’ के जोड़ पर मुंह नहीं खोलता।  सौरभ द्विवेदी ‘बकैत पाण्डेय’ यानी एनडीटीवी के रवीश कुमार का ही टू-कॉपी है। अब, लोगों को समझ में नहीं आता कि ज्यादातर ब्राह्मण ही वामपंथी विचारधारा के वाहक कैसे बने हुए हैं। जबकि, वामपंथी इतिहासकारों के अनुसार ‘दलितों-पिछड़ों’ पर जुल्म करने के आरोपी एकमात्र ब्राह्मण यानी मनुवादी हैं।

ताज़ा खबर में गोरखपुर में पंचायत चुनाव को लेकर आजतक वेवसाइट ने एक खबर प्रकाशित की। एक ही खबर को कुछ ही अंतराल में दो विपरित हेडिंग से अपडेट कर प्रकाशित किया। शुरू में खबर की हेडिंग में साफतौर लिखा गया कि ‘पंचायत चुनाव: गोरखपुर में हारे हुए प्रत्याशी को जीत का प्रमाणपत्र देने पर बवाल, चौकी फूंकी’ यानी सौफतौर पर आजतक ने निर्णय दे दिया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन यानी योगी सरकार यानी बीजेपी सरकार हारे हुए प्रत्याशी को जीत का प्रमाणपत्र दे रही है। लेकिन, थोड़ी देर में इसी खबर की हेडिंग बदलकर लिखा ‘पंचायत चुनाव : गोरखपुर में वोटिंग में हेरा-फेरी का आरोप, भीड़ ने पुलिस चौकी-गाड़ियां फूंकी’। यानी आजतक वेवसाइट ने सरकार पर साफतौर पर हारे हुए प्रत्याशी को जिताने का इल्जाम लगा दिया। जब ये मामला सोशल मीडिया पर पूरी तरह से फैल गई तो उसकी हेडिंग बदल दी गई। आजतक वेवसाइट पर ऐसी ही खबरों की भरमार रहती है। आजतक का वेवसाइट बीबीसी हिन्दी की तर्ज पर चलता है जो भारत में मोदी सरकार विरोधी खबरों का संयोजन करता है और उसे दुनिया में फैलाता है और इसके लिए खासतौर पर मुसिलम पत्रकारों का उपयोग किया जाता है।

 

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